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Sunday, September 25, 2011

“मास्टर साहब” द्वारा - डॉ नूतन गैरोला

 
                                       मास्टर साहब
                  mastar sahab
सर ! ..फीस तो सिर्फ पिच्चासी  रूपये हैं … मैंने तो आपको पांच सौ रूपये का नोट दिया है … बाकी  रूपये मुझे माँ को वापस करने हैं … प्लीज़ सर वो रूपये जरूरी हैं … पर मास्टर साहब जी थे कि कोई जवाब नहीं दे रहे थे और कॉपी चेक करने में तल्लीन थे … सुधीर अपने मास्टर साहब जी से विनती कर गिङगिङा रहा था, लेकिन गुरु जी के कानों में जूँ भी ना रेंक रही थी …. थकहार कर सुधीर स्टाफ रूम से बाहर निकला जहाँ उसके अन्य मित्र सुएब, रतन, देबोषीश,प्रांजल  खड़े इन्तजार कर रहे थे … सुधीर को देख कर उनकी बांछे खिल आई …
                            “अब आज तो किसी अच्छे रेस्टोरेंट में जा कर स्नेक्स लेंगे| चल यार, चार पीरियड छोड़ देते हैं, आज “सिटी इंट्रो” में नयी रेसीपीस चखेंगे   और वही से गेम पार्लर चले जायेंगे फिर छुट्टी के समय घर पहुँच जायेंगे”- सुएब बोला|  …. सुधीर का चेहरा उतरा हुआ था|  देबोषीश अचंभित हो कर बोला - "क्या बात है सुधीर तेरा चेहरा इतना क्यों उतरा हुआ है |"  सुधीर लंबी सांस ले कर बोला –" देबू, क्या कहूँ यार मास्टर साहब ने तो मेरे पैसे लौटाये ही नहीं| तुम लोग चले जाओ आज मुझे पैसे वसूलने हैं मास्टर साहब से, मैं क्लास में ही हूँ|" वह क्लास की ओर मुड गया|
                             दूसरे दिन स्कूल की प्रार्थना से पहले चारों दोस्त फिर एक थे .. सुधीर उनके ऐश की बातें सुन कर दुखी था कि कल उसको मास्टर साहब की वजह से कितना नुक्सान हुवा| आज मास्टर साहब से रूपये ले कर क्लास बंक कर दूँगा| वह सोच ही रहा था कि तभी पीछे से आवाज आई – “ सुधीर क्या तुने कल की क्लास अटेंड की|” कक्षा का पढाकू चश्मिश( अनुपम) उस से पूछ रहा था| सुधीर बोला – हाँ, बोल क्यों पूछ रहा है? अनुपम बोला - कल तबियत खराब थी सो स्कूल नहीं आ पाया था कल| तू नोट्स साफ़ लिखता है और तेजी से भी पूरा लिख लेता है| तेरे लिखे नोट्स चाहिए| पर हाँ ! अगर तुने क्लास अटेंड की हो तब ना|      सुधीर बोला - हाँ हाँ, कल मैं क्लास में ही था और उसने अपना सीना तान कर अनुपम को नोट्स कॉपी करने के लिए दिए|  वह प्रार्थना के बाद अपने पैसे वसूलने की मंशा से क्लास में जा बैठा -- मास्टर साहब अटेंडेंस लगा रहे थे| उसका  नाम आने पर मास्टर साहब ने  चश्मा चढा  कर एक तीखी नजरों से उसको देखा ..वह डर सा गया पूछने की हिम्मत जवाब सी दे गयी…
                             मरता क्या ना करता आखिरी पीरियड का इन्तजार किया| साथी तो फिर बंक कर चुके थे … उसे मास्टर साहब पर बहुत गुस्सा आ रहा था| उसने मास्टर साहब को आखिरी पीरियड में ढूंढ निकाला| बोला सर मेरे पैसे - मास्टर साहब बोले - कल क्लास में मिलना आज तो पैसे जमा कर चुका हूँ | सुधीर अपना सा मुँह ले कर रह गया|
                              अगले दिन, सुबह एसेम्बली के समय अनुपम सुधीर के पास आया और उसके नोट्स वापस करते हुए बोला, सुधीर तू इतना अच्छा लिखता है और तू तो बहुत इंटेलिजेंट भी है, फिर क्लास से क्यों भागता फिरता है| सुधीर बोला…” अपनी बात छोड़ अनुपम, मुझे तुम सा किताबी कीड़ा नहीं बनना” अनुपम बोला ठीक है तुझे जैसा लगता हो तू वैसा कर, लेकिन परीक्षा  के अभी पन्द्रह  दिन भी शेष नहीं रह गए, आजकल तो बहुत आवश्यक चीजे पढाई जाती हैं जो इम्तिहान के लिहाज से जरूरी है| तेरे नोट्स मेरे लिए बहुत काम के हैं|यह कह उसे  धन्यवाद करता हुआ अनुपम चला गया .. अनुपम की बात से सुधीर को लगा कि  वह भी अच्छा लिखता है.. क्लास के टॉपर को उसका लिखा पसंद आया  है…उसे अपने पर खुशी हुई …और एक ख्याल उसके दिल में लहरा गया कि - वह कक्षा में पढाई के मामले में अब्बल रह सकता है ..अगर वह चाहे तो|
लेकिन अगले ही पल उसके जिगरी दोस्त पहुँच गए बोले - आज मेट्रो में थ्रिलर मूवी रिलीज़ हो रही है, काफी मजा आयेगा ..वही स्कूल के इंटरवल के बाद वहाँ जाएंगे| आज तो सुधीर फाइनेंस करेगा टिकट|
सुधीर बोला – “ ठीक है आज उस खडूस मास्टर साहब से अपने रूपये ले कर रहूँगा| “
वह मास्टर साहब के कमरे के बाहर पहुंचा --- मास्टर साहब बड़ी तेजी से रजिस्टर ले कर क्लास की और बढ़ गए| सुधीर सर सर आवाज लगाता रह गया| खैर, मास्टर साहब के पीछे पीछे वह क्लास में पहुँच गया जहाँ उपस्तिथि दर्ज होने के बाद पाठ्यकर्म शुरू हुआ और रिविजन के लिए कल के पाठ से प्रश्नोत्तरी  की गयी| कल कक्षा में उपस्तिथ रहने की वजह से सुबोध बडचढ कर सही जवाब देने लगा|
मास्टर साहब ने पूरी क्लास के आगे सुधीर की तारीफ की और उसे कहा  कि सुधीर उन छात्रों के लिए भी एक प्रेरणा का स्त्रोत होगा जो अपनी शैतानियों की वजह से सबका सिरदर्द बने है और गन्दी आदतों का शिकार हुए  हैं …समय रहते आप भी सुधीर की तरह पढाई में मन लगाये तो आप भी क्लास मे सही जवाब दे सकते हैं … सुधीर के दोस्तों की चौकड़ी में खलबली मच गयी ….
छूटते ही साथ उन्होंने सुधीर को कहना शुरू किया और मिस्टर पढाकू जी!! तुम कब से किताबी कीड़े बन गए  दोस्तों को भी नहीं बताया … सुधीर बोला- नहीं यार! वो मासाब का दिमाग खराब हो गया है … उन्होंने मेरे रूपये दबा रखे हैं …उनकी नियत में तो मुझे खोट दिखाई देता है .. तभी वह बिन बात मेरी तारीफ़ कर रहे थे ….जब मैं अपने पैसे ले लूँगा तब वो मेरी तारीफ़ कैसे करेंगे,  देखता हूँ| लेकिन दिन यूं ही निकल गया| मासाब ने पैसे को ले कर सुधीर को घास नहीं डाली, सिर्फ यही कहा की क्लास के बाद दूँगा …. लेकिन क्लास के अंत में मासाब नहीं दिखाई दिए वह उन्हें ही ढूँढ रहा था  कि क्लास की लड़कियों का समूह आ गया| वो कह रही थी सुधीर, तुम में तो कमाल की एनालिसिस पावर है, लगता है तुम पढ़ने में मन लगाने लगे हो …क्या कुछ टॉप वोप मारने का इरादा है ( थोडा व्यंग था उस जुबान में )…पर फिर गंभीर हो कर एक लड़की बोली कि अगर तू क्लास में अच्छा निकले तो हम सब को भी खुशी होगी …और आंटी को भी खुशी मिलेगी .. सुधीर बाल झटक कर हुह कहता हुआ  निकल गया किन्तु मन ही मन सुधीर को अच्छा लगा|  उनकी बात सुधीर के मन घर कर गयी … सोचने लगा कि माँ हमेशा उसको ले कर दुखी रहती है … लोगों के कपडे प्रेस करती है दिन भर जहाँ तहां के कपडे धो कर गुजारा भर कमाती है … माँ उसे बहुत प्यारी है  वह भी तो माँ को बेहद प्यार करता लेकिन घर की गरीबी उसे  बिलकुल नहीं सुहाती … इसी लिए तो वह अपने दोस्तों के साथ क्लास से भाग जाता है .. बाहर जा कर उसे दुनिया की लक्जरी इन्जॉय करने का मौका मिलता था और माँ ? माँ चाहती थी की वह पढ़ लिख कर इस काबिल बने की उसे जीवन में आगे कोई कमी ना हो वह माँ के लिए क्लास जाता और अपने लिए क्लास  बंक करता … उसे एहसास सा होने लगा की अगर वह थोड़ी मेहनत करे तो उसकी  माँ की आँखों में खुशियां आ जाएँगी … और अभी तो सिर्फ दस दिन की ही मेहनत है .. इम्तिहान होने के बाद तो मौज ही मौज होगी … वह घर जा कर किताब खोल कर पढ़ने और मनन करने लगा … आज का जो पाठ पढाया था, कल का जो पढ़ा था, उसने पढ़ा| उसे बहुत रोचक लगा| फिर तो वह पन्ने के पन्ने पलटता गया मनन करता, समझता, हल करता, गणित उसे पहेलियों जैसी लगी, जिनके उत्तर ढूंढना मजेदार लगता और वह गणित के फोर्मुले सोचता, अपलाइ करता और गणित की गुत्थियों को सुलझाता … उसे बहुत आनंद आने लगा ..कुछ प्रश्न भी उसके दिमाग में अटके पड़े थे .. उसने ठान ली कि ऐसे इन्हें छोड़ नहीं दूँगा, कल सर से पूछूँगा क्लास में… उसके मन में एक नया उत्साह समावेश कर गया … उसे लगा क्यों नहीं उसने पढाई की ओर पहले ध्यान दिया |
   अब वह स्कूल में एक नए जोश के साथ था उसका पूरा ध्यान पढाई की ओर था …लेकिन दिल में मासाब के द्वारा उसके रूपयों को वापस ना देना बहुत अखर रहा था … आज क्लास में अन्य विषयों के अध्यापक भी उस की विषय को ले कर गहरी रूचि और अध्यन के प्रति झुकाव देख बेहद खुश थे ..और सही जवाब देने पर उसे  यदा कदा शाबास कह रहे थे| उसे बेहद अलग अनुभव हुवा …जहाँ आये दिन उसकी बेंत से पिटाई होती …उसके घर शिकायत जाती …उसकी माँ रोते हुवे आती और जब तब उसे नालायक कहा जाता …वही अपने लिए शाबास सुन कर दिल खुशी से और उर्जा से भर रहा था|
         किन्तु वह अपने रुपयों के लिए आखिरी पीरियड में फिर मासाब के पास गया … मासाब बोले क्या बात है, इस समय मेरे पास कैसे आना हुआ … सुधीर को लगा जैसे मासाब जानबूझ कर उसके रूपयों के बारे में भूल गए हैं …शायद उनके मन में चोर बैठ गया है….वह बोला सर मेरी फीस के बचे रूपये मुझे वापस चाहिए …. मासाब अगले बगले झाँकने लगे …इस जेब में हाथ डाला… उस जेब में हाथ डाला ….   और एक, हज़ार रूपये का नोट निकाला …. बोले आज तो टूटे रूपये  नहीं है मेरे पास| तुम कल शाम को मिलना ….और हाँ तुम जब भी रूपये लेने आओ क्लास अटेंड कर, आखिरी खाली पीरियड में आना … अगर बीच क्लास में पैसे की बात करोगे तो वह रूपया तुम्हें वापस नहीं होगा और अगर किसी भी पीरियड में तुम उपस्थित नहीं दिखे तो समझ लो तुम्हारा रूपया गया  ….     जी सर कह, वह मन मसोस कर वापस आ गया|
             अगले दिन स्कूल में सुधीर का चौकड़ी ग्रुप इकठ्ठा हुवा ..उसके दोस्तों ने उस से पूछा कि क्या हुआ मासाब ने तेरे रूपये वापस किये - सुन सुधीर फट पड़ा - बोला यार ये भी कोई गुरुजन है .. आक्खा भारत का चोर, मेरे रूपये दबा लिए अब वापस करने का कोई इरादा नहीं… तिस पर अगर मैंने क्लास के आगे कभी रूपये की बात करी तो वो कह रहे हैं  कि फिर वो  मुझे पैसे नहीं लौटायेंगे …. मन तो करता है कि इनकी शिकायत प्रिंसिपल से कर दूँ| जब नौकरी जायेगी तब पता चलेगा पैसे की कीमत …. दोस्त बोले फिर देरी किस बात की चलते हैं प्रिंसिपल ऑफिस … सुधीर बोला छोड़ यार आजकल पढाई का जोर चल रहा है…खाम खाम इस लफड़े में नही फंसना … इम्तिहान के बाद जरूर इनकी शिकायत प्रिंसिपल से करेंगे … अभी भी देख लेता हूँ शायद मासाब सुधर जाएँ, शायद उन्हें कुछ समझ आये ..वो मेरे पैसे वापस कर दें| फिर तुम्हें पार्टी दूँगा … दोस्त बोले तो क्या करें आज ….सुधीर बोला तुम जाओ बंक में या मेरे साथ क्लास अटेंड करो लेकिन में बंक कैसे कर सकता हूँ ..पढाई तो जायेगी ही मेरे तो पैसे भी डूब जायेंगे|… दोस्त बोले ठीक है और क्लास की ओर चल दिए | इसके बाद भी सुधीर दो तीन बार अपने मासाब से मिला लेकिन वह हर बार कुछ बहाना बना देते शायद उनके मन में चोर आ गया था|
अब इम्तिहान नजदीक था.. तीन  दिन शेष …सुधीर रात दिन एक कर रहा था सिर्फ और सिर्फ इम्तिहान की तैयारी … उसने सोच लिया कि रूपये नहीं मिलने वाले….जरूरत पडने पर टेडी ऊँगली से घी निकालना पड़ेगा...लेकिन अभी परीक्षा की तैयारी में मन लगाना होगा|
                   माँ भी उसकी मेहनत से अवाक थी और बेहद प्रसन्न …रोज भगवान की पूजा अर्चना कर सुधीर को  तिलक लगाती ..दही चीनी से उसका मुँह मीठा कर  परीक्षा के लिए भेजती| सुधीर भी अपनी परीक्षा से खुश था … उसके हिसाब से पेपर अच्छे हुवे थे ….
                    परीक्षा खतम होने के बाद सुधीर स्कूल गया वो फिर मासाब से पैसे लेने गया … तो पता चला के मासाब छुट्टी ले कर एक महीने के लिए बाहर गए हैं …  सुधीर ने सोचा यह भी एक इम्तिहान है… कुछ दिनों की बात है …इस बीच वह मासाब पर अपनी झींक, उनके लिए बुरा भला कह कर दोस्तों के साथ निकालता है|
              सुधीर का परीक्षा परिणाम आज दिन  में निकलने वाला है| स्कूल से उसकी क्लास के सभी  बच्चों को बुलाया गया है ….उसे चिंता सी हो रही है |  वहाँ बच्चे और रिश्तेदारों की भीड़ रिजल्ट लेने आई हुई  थी| मासाब भी उसे भीड़ में प्रसन्नचित दिखे .. तभी घंटी बजी और सभी बच्चे एसेम्बली हॉल मे एकत्र हुए …प्रिंसिपल महोदय ने आ कर परिणाम की घोषणा की … क्लास में कुछ बच्चे अनुतीर्ण थे …कुछ बच्चे दरमियाना नंबर ले कर उत्तीर्ण हुए थे …और कुछ बच्चे बहुत अच्छे अंकों  से .. प्रिंसिपल बोले मैं कक्षा के प्रथम तीन विद्यार्थियों के नाम की घोषणा करूँगा …बाकी सभी विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक से रिजल्ट लेंगे ,,, और प्रिंसिपल महोदय ने घोषणा की-“ कक्षा ११ में जो बच्चा प्रथम आया है उसका नाम है  -  अनुपम …सुधीर बहुत खुश हुआ|  वह  तालियाँ जोर जोर से बजा रहा था ….अनुपम ने अपना पुरुस्कार लिया ….तब तक दुसरा नाम घोषित किया गया …वह नाम था - "सुधीर" ….सुधीर को यकीन नहीं हुवा … पुनः पुकारा गया गया सुधीर खंडूरी  …क्या सुधीर खंडूरी को सुनाई दे रहा है उनका नाम ..सुधीर स्टेज पर आये …अपना परीक्षा परिणाम और पुरूस्कार ले जाए …. मासाब ने स्टेज से सुधीर को देखा तो चिल्ला पड़े सुधीर जल्दी आओ…तब तक क्लास के अन्य छात्र भी कहने लगे - सुधीर!  हाँ, तुम्हारा नाम ही पुकारा जा रहा है , जाओ ..जाओ … सुधीर को यकीन नहीं हो रहा था ….उसकी आँखों के आगे  माँ का मुस्कुराता चेहरा नजर आने लगा …वह चाह रहा था कि दौड कर माँ के पास जाए और उसको खबर सुनाये ..  उस से लिपट कर रोये … वह आगे बढता हुवा स्टेज में पहुंचा .. तब तक प्रिंसिपल महोदय कह रहे थे कि  सुधीर अपनी कुछ बुरी आदतों के चलते स्कूल बंक करता था . और कक्षा में अनुपस्तिथ  रहता था, घर में भी उसकी आदतों से उसकी माँ परेशान रहती थी और यहाँ स्कूल में गुरुजन लेकिन  अचानक जिस तरह  उसने खुद में बहुत परिवर्तन किये ..हर क्लास में नियमित उपस्थित होना और मन लगा के पढ़ना …क्यूंकि उसने अपनी गन्दी  आदतों को त्याग कर सही रास्ता चुना और उस पर चल पड़ा| आज उसका परिणाम ही है कि वह कक्षा में दि्वतीय स्थान पर आ सका … वह अनुकरणीय है …अन्य बच्चे भी समझ सकते है कि अपने अंदर निहित दुर्गुणों को त्यागा जा सकता है … और अपने लिए एक अच्छा रास्ता चुन कर अपने भविष्य को सुन्दर बनाया जा सकता है … हॉल तालियों से गूंज गया|
सुधीर दोस्तों के साथ घर जा रहा था कि मास्टर साहब उसे ऑफिस के बाहर दिखाई दिए| मास्टर साहब ने उसे इशारे से बुलाया और अपने ऑफिस में ले गए – बोले – “आज बहुत खुश हो ना तुम,  मैं भी हूँ | मैंने ब्रिलियेंट स्टूडेंट स्टडी फंड में तुम्हारे विषय में सुचना दी थी .. तुम्हारी योग्यता को देख तुम्हारी फीस इस साल से माफ हो जायेगी .. और स्कॉलर स्टुडेंट्स फंड से तुम्हें वजीफा भी मिलेगा जिस से तुम अपनी कॉपी किताब खरीद सकोगे|” ..यह कह कर उन्होंने जेब में हाथ डाला और पांच सौ रूपये का नोट निकाला और बोले यही है ना वो रुपया जिसकी वजह से तुमने कक्षा में नियमित  बैठना शुरू किया था| आज मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे लौटा रहा हूँ लेकिन प्रण करो कि अबसे हमेशा क्लास अटेंड करोगे और इसी तरह अच्छा नाम कमाओगे … सुधीर का सिर आदर से झुक गया … फिर मास्टर साहब ने अलमारी से एक मिठाई का डिब्बा निकाला और सुधीर के हाथ में रख दिया, बोले - जाओ बेटा, यह मिठाई का डिब्बा अपनी तरफ से अपनी माँ को देना  और खुशखबरी सुनाना, वह बहुत खुश होंगी  ..सुधीर का ह्रदय खुशी से आह्लादित हो रहा था| वह  आदर, कृतज्ञता और प्रेम से मास्टर साहब के चरणों पर  झुक गया||
                        कहानी - डॉ नूतन डिमरी गैरोला
चित्र नेट से...
कहानी की प्रेरणा मुझे अपने बड़े भाईसाहब श्री श्रीप्रकाश डिमरी जी से मिली... जो कि एक समर्पित शिक्षक हैं....

25 comments:

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

काश, सभी अध्‍यापक ऐसे होते।

सुंदर एवं सार्थक कहानी।

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आप चलेंगे इस महाकुंभ में...
...मानव के लिए खतरा।

वन्दना said...

आंख नम हो गयीं……………काश ये जज़्बा आज के सभी अध्यापको मे होता

Anita said...

बहुत सुंदर और रोचक कहानी, विद्यर्थियों को यह कहानी अवश्य पढनी चाहिए ...बधाई !

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह! बहुत सुन्दर

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह! बहुत सुन्दर

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह! बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! यदि अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही अच्छी कहानी, कम से कम धन की चिन्ता अच्छी पढ़ाई का माध्यम बनी।

Barthwal Pratibimba said...

नूतन जी शिक्षा केवल किताबों के द्वारा ही नही या क्लास रूम मे ही नाही उससे बाहर भी हमे मिलती है। और येसे शिक्षको को सलाम जो इसमे भी सक्रियता से अपना फर्ज़ निभा रहे हैं। .... बहुत सुंदर कहानी और शिक्षा व शिक्षक का ये पहलू सबके सामने रखने के लिए आभार।

Maheshwari kaneri said...

बहुत रोचक कहानी...

Roshi said...

बहुत ही प्रेरणा दायक कहानी ,,,,,,,,,,,,आज न तो ऐसे अध्यापक है न ही बच्चे जो थोड़े हैं भी उनकी गिनती नहीं है

ताऊ रामपुरिया said...

अति मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

एक आदर्श गुरू की बढिया कहानी ॥

डॉ. सरोज गुप्ता said...

नूतन जी,आज भी शिक्षक ही अपने छात्रों को सही दिशा देकर उसका जीवन -सुधार सकता है ,आपकी इस रचना से यही व्यंजित हो रहा है !बच्चे अपने माँ -बाप से ज्यादा शिक्षक की बात को महत्व देते हैं पर शिक्षक आपकी कहानी का 'मासाब 'होना चाहिए !बधाई एक सन्देश वाहक रचना के लिए !!

ऋता शेखर 'मधु' said...

आदर्श शिक्षक की कसौटी पर खरे उतरते आदर्श शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी|

tanhaai pursukun said...

Nutan ji,
Aapki kalam se ek achchi rochak prernadayak avum bhavpurn rachna nikli aur hum sabko padhne ke liye mili. Dhanyavaad. Aapki agli rachna ka besabri se intzaar hai.

NEELKAMAL VAISHNAW said...

नूतन जी नमस्कार
प्रेरणा से परिपूर्ण, बेहतरीन प्रस्तुति
आप भी मेरे फेसबुक ब्लाग के मेंबर जरुर बने
mitramadhur@groups.facebook.com

MADHUR VAANI
BINDAAS_BAATEN
MITRA-MADHUR

Kailash C Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...काश यह ज़ज्बा सभी शिक्षकों में होता..

Atul Shrivastava said...

गहरे संदेश देती रचना।
पर मौजूदा दौर में ऐसे शिक्षक देखने कहां मिलते हैं।
काश.... इस कहानी के जैसे शिक्षक होते तो हर बच्‍चे की प्रतिभा को निखारा जा सकता था....

Babli said...

बहुत सुन्दर लगा! बेहतरीन प्रस्तुती!
दुर्गा पूजा पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनायें !
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

abhi said...

वाह!! क्या कहानी है, मास्टर साहब हों तो ऐसे हों :)

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

बहुत ही प्रेरणा दायक कहानी,आज न तो ऐसे अध्यापक है न ही बच्चे जो थोड़े हैं भी उनकी गिनती नहीं है.....

Navin C. Chaturvedi said...

विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व, सभी के जीवन में संपूर्णता लाये, यही प्रार्थना है परमपिता परमेश्वर से।
नवीन सी. चतुर्वेदी

अनुपमा पाठक said...

प्रेरक कहानी!

rpkimothi said...

मन की गहराइयॊं कॊ छू लेने वाली अनुकरणीया कहानी... सुंदर